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दिल्ली HC ने केंद्र और राज्य की सरकारों से कहा- सरकारी सुविधाओं में दिव्यांगों की जरूरतों से ना हो समझौता

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दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार को कहा कि वह सार्वजनिक सुविधाओं के इस्तेमाल से समाज के किसी भी वर्ग को ‘‘बाहर किया जाना बर्दाश्त नहीं’’ करेगा और इसके साथ ही केंद्र, दिल्ली सरकार तथा स्थानीय निकायों को खास तौर पर दिव्यांगों की जरूरतों को लेकर और संवेदनशील होने का निर्देश दिया.

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल और न्यायमूर्ति सी हरिशंकर की पीठ ने एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की. याचिका में दावा किया गया था कि राजधानी में अधिकतर जन सुविधाएं दिव्यांगों के अनुकूल नहीं है.

सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने कहा कि उसके 22 पुलिस थाने पूरी तरह से दिव्यांगों के अनुकूल हैं.

यह प्रतिवेदन दिल्ली सरकार के अतिरिक्त स्थायी अधिवक्ता नौशाद अहमद खान द्वारा दिया गया.

इस दावे से संतुष्ट नहीं होते हुये पीठ ने पूछा कि क्या नए पुलिस थानों की हवालात में आरोपियों के लिए दिव्यांग अनुकूल शौचालय हैं.

अदालत ने यह भी पूछा कि क्या ‘‘तिहाड़ में दिव्यांग अनुकूल शौचालय हैं.’’

अदालत ने पुलिस से कहा कि उसके थाने सिर्फ शिकायतकर्ताओं और दिव्यांग अनुकूल ही नहीं बल्कि आरोपियों के लिए भी होने चाहिए.

 

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