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मदर टेरेसा की संस्था में 108 गर्भवती लड़कियां थी, CWC को 10 नवजात दिखाए.. बाकी बेच दिए गए

Written By Amit Bajpayee | Mumbai | Published:


मिशनरीज ऑफ चैरिटी के रांची स्थीत चैरिटी होम से नवजातों की बिक्री का मामला पहली बार सामने नहीं आ रही है. इससे पहले 2016 में विशेष  शाखा ने राज्य सरकार को एक रिपोर्ट सौंपी थी. जिसमें कहा गया था कि रांची के ईस्ट जेल रोज में स्थित निर्मल  हृदय चैरिटी होम से बच्चों की बिक्री की जा रही हैं. 

रिपोर्ट में बताया गया था कि 2016 में इस चैरटी होम में 108 गर्भवती महिलाएं थी, जबकि उस वर्ष संस्था ने सिर्फ 10 बच्चों को एडॉप्शन के लिए सीडब्ल्यूसी के समाने दिखाया गया. बाकी 98 बच्चों का कोई रिकॉर्ड नहीं दिया गया. 

अंदेशा जताया जा रहा है कि इन बच्चों को दूसरे राज्यों के दंपतियों को बेचा गया है. ये रिपोर्ट अब दोबारा सरकार ने मंगवाई है. 

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यही नहीं, इससे पहले 2014 में एक दंपती ने तत्कालीन सीडब्ल्यूसी अध्यक्ष डॉ. ओमप्रकाश सिंह के सामने भी  शिकायत दी थी कि चैरिटी होम निर्मल हृदय और हिनू स्थित निर्मला शिशु भवन ने बच्चे के बदले पैसे मांगे हैं. जब चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (CWC) की टीम पहुंची तो संचालिका और वहां मौजूद स्टाफ ने हंगामा किया और उन्हें अंदर नहीं घुसने दिया.

कैसे फंसाते थे गर्भवती लड़कियों को 

स्पेशल ब्रांच की रिपोर्ट में यह साफ कहा गया है कि निर्मल चैरिटी होम में बच्चों की बिक्री की जाती है. इसके लिए एजेंट बिन ब्याही आदिवासी गर्भवती महिलाओं को मुफ्त में रहने, डिलिवरी खर्च उठाने का झांसा दे  रांची के इस चैरिटी होम में लाते थे.

 उन महिलाओं से अंग्रेजी में लिखे कागज यानी शपथ पत्र पर हस्ताक्षर कराते हैं. शपथ पत्र के अनुसार बिन ब्याही मां अपने बच्चे पर दावा पेश नहीं कर सकती है. और बच्चे के जन्म के तुरंत बाद उसे बेच दिया जाता है.

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वहीं इस मामले की गंभीरता को देखते हुए बच्चों के सौदे पर सीएम रघुवर दास ने सख्त रुख अपनाया है. उन्होंने कहा कि नवजातों की खरीद-बिक्री और ग्रभवती महिलाओं का शोषण करने वाली मिशनरीज ऑफ चैरिटी जैसे संस्थाओं की पहचान कर उसके खिलाफ कड़ी कारवाई की जाएगी. उन्होंने निर्देश दिया कि वह पूरे राज्य में ऐसे एनजीओ की जांच करे. ऐसे कामों में लिप्त संस्थाओं को चिन्हित कर और 15 अगस्त तक रिपोर्ट दें. ऐसे संस्थाओं को छोड़ा नहीं जागा. 
 

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