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तमिलनाडु: पलानीस्वामी सरकार को मिली बड़ी राहत, HC के जजों ने सुनाया खंडित फैसला

Written By Neeraj Chouhan | Mumbai | Published:

अन्नाद्रमुक से दरकिनार किए गए नेता टीटीवी दिनाकरण के समर्थक 18 पार्टी विधायकों को अयोग्य करने को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर मद्रास उच्च न्यायालय ने खंडित फैसला सुनाया. मुख्य न्यायाधीश इंदिरा बनर्जी ने विधायकों को अयोग्य करार देने के विधानसभा अध्यक्ष के आदेश को बरकरार रखा जबकि न्यायमूर्ति एम सुंदर ने इसे रद्द कर दिया.  

अब मुख्य न्यायाधीश के बाद आने वाले वरिष्ठतम न्यायाधीश इस मामले पर नए सिरे से सुनवाई करेंगे

बीते साल को  तमिलनाडु विधानसभा के अध्यक्ष पी धनपाल ने पार्टी से हटाए गए उप महासचिव टीटीवी दिनाकरण के प्रति निष्ठा रखने वाले अन्नाद्रमुक के 18 विधायकों को दल-बदल संबंधी नियम के तहत अयोग्य घोषित कर दिया था.

विधानसभा सचिव के भूपति ने एक बयान में कहा था कि मुख्यमंत्री के पलानीस्वामी के खिलाफ पिछले माह विद्रोह करने वाले 18 विधायकों के खिलाफ संविधान की दसवीं अनुसूची के अनुरूप बनाए गए दल-बदल विरोधी एवं अयोग्यता कानून 1986 के तहत यह कदम उठाया गया था. 

 अयोग्य घोषित किए गए विधायकों के नाम थंगा तमिल सेलवन, आर मुरुगन, मारियुप कन्नेडी, के काथीरकमू, सी जयंती पद्मनाभन, पी पलनिअप्पन, वी सेंथिल बालाजी, सी मुथैया, पी वेत्रिवेल, एन जी पार्थीबन, एम कोठांदपानी, टीए एलुमलै, एम रंगासामी, आर थंगादुराई, आर बालासुब्रमणी, एसजी सुब्रमण्यम, आर सुंदरराज और के उमा महेरी हैं.

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